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मेरे रिंगमास्टर का चिड़ियाघर

रिंगमास्टर और चिड़ियाघर? ये क्या झोल मेल है?

रिंगमास्टर? वो भी मेरा? और उसका चिड़ियाघर? रिंगमास्टर का तो सर्कस होता है ना? फिर? कुछ झोल-मेल है क्या?
अब क्या कहूं... कुछ बातें ऐसी भी होती हैं, कि उन्हें कहा नहीं जाता. पर क्या ही करें, बिन कहे भी रहा नहीं जाता. 
तो उपाय यूं था, कि सीधे से कहूं भी ना, और बिन कहे रहूं भी ना.
पहेली नहीं है, पर पहेली से कम भी नहीं है... ना ये कविता, ना मेरा रिंगमास्टर, ना उसका चिड़ियाघर
:-)

प्रेम के अनोखे स्वाद

प्रेम के अनोखे स्वाद - हिंदी कविता

प्रेम की विविधता असीम है... कौन कुछ शब्दों में बाँध पाया है. कुछ लोग मिले थे, प्रेम के खट्टे-मीठे-तीखे स्वाद को नकार रहे थे... उनका मानना था, कि मीठी बातें ही प्रेम को अभिव्यक्त करती शोभा देती हैं. उन्हीं विचित्र लोगों से प्रेरणा मिली इस रचना की.

छोटा सा ही हूं अभी, नन्हा सा...

छोटा सा ही हूं...

बाल शोषण की समस्या विकराल दैत्य की तरह है. इसके कई भयावह पहलू हैं. बच्चे को भूख लगने पर खा जाने वाले पशुता से भी अधिक गर्त में जा चुकी मनुष्यता का विकराल दर्पण है बाल शोषण. एक अबोध, निश्छल बाल मन को क्रूरता के अतिरेक से छले जाने का प्रतिरूप है बाल शोषण.

कभी कभी लगता है...

एक कविता जो मैंने अपने लिए लिखी है... बस यूं ही मन किया, कि कुछ ऐसा भी हो जो आप मुझी को समर्पित हो. मेरे बारे में कुछ बातें कहती कविता... कुछ अटपटी सी बातें, अटपटी पर असली. असली, मनचली हवा जो कभी मन मोह लेती है, और कभी चुगली बनकर गले में अटक जाती है.   

कभी चिड़ियों को आवाज़ बदलकर मैं आवाज़ लगाती हूँ,
कभी बंद कमरे में बिन बादल ही मोरनी-सा नाच रचाती हूँ, 
कभी घोड़ी का मानस धरकर यहां-वहां फुदकती फिरती हूँ,
और कभी, हाथ बांधे गांभीर्य ओड़ मैं इधर-उधर विचरती हूँ,
आंकलन करूं तो, दीवानेपन की गुगली तो मैं हूँ, 
कभी-कभी लगता है, थोड़ी सी पगली तो मैं हूँ

सितारों से पूछा

दीपावली पर लिखी हिंदी कविता

त्यौहारों में प्राचीन व धर्मसंगत विधि-क्रियाओं के अतिरिक्त समय के साथ जुड़ती हुई परंपराएं विकट परिस्थितियां उत्पन्न करती हैं. यह कविता सितारों से हुए काल्पनिक वार्तालाप के माध्यम से ऐसी ही एक समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है. इस वार्तालाप में छिपे व्यंग्य से किंचित्‌ एक दंभ से भरा मानस के कुतर्क व अनर्गल कर्म को सही ठहराने के प्रयत्न की भी अनुभूति हो सके. 

मेरी प्यारी अध्यापिका - बाल कविता

Meri Pyari Adhyapika - Hindi Poem for kids

जयोम की कक्षा में वाक्‌ प्रतियोगिता के लिए लिखी एक छोटी सरल बाल कविता. 

घर छोड़ कर शुरु-शरू में स्कूल चला जब आता था,
मां को याद कर कर के, मैं बहुत आंसू बहाता था...

आया राखी का त्यौहार - रक्षाबंधन के त्यौहार को समर्पित कविता

Aaya Rakhi ka Tyohaar - Rakshabandhan ke Tyohaar ko Samarpit Kavita

रक्षाबंधन के त्यौहार को समर्पित कविता. .

रंग बिरंग नग-मनके जड़ी,
राखियां सजी छोटी-बड़ी,
समेटे धागे में स्नेह अपार,
आया राखी का त्यौहार,


रक्षाबंधन की रौनक त्यौहार के कुछ दिन पहले ही से छाने लगती है. मेरी टेबल पर, राखियों का छोटा सा ढेर लगा है. सारे भाइयों के लिए उनकी पसंद के हिसाब से राखियां ले आई..

खुशियों का मोल

खुशियों का मोल
अनमोल खुशियों का तोलमोल छोडें, इन्हें खरीदना, बेचना, चुराना, छीनना संभव नहीं. बस इनके योग्य बनने का प्रयत्न ही किया जा सकता है... इन्हीं भावों को शब्दों में पिरोती कविता...
नापा न जा सके खुशियों के मोल को
देखा है कभी मुस्कान के तोल को?

छवि देख तिहारी, दुल्हन प्यारी...

Chavi Dekh Tihari
अपने भैया की शादी में दुल्हन की छवि का बखान करते लिखी थी ये कविता ...

सच्चे पल, झूठे रिश्ते

सच्चे पल, झूठे रिश्ते
सच है कि रिश्ते अनमोल होते हैं. पर जीवन में कई अपवाद भी होते हैं.
दिखावे के रिश्तों के लिए जीवन के अनमोल पल, सच्ची भावनाएं ज़ाया न करें...
इन्हीं भावों को शब्दों में पिरोती कविता... 


प्यारी बहना दुल्हन बनी है

प्यारी बहना दुल्हन बनी है

रूचि की पहली सालगिरह आने को है, तो विविध-संकलन का ये संस्करण
रूचि, परिमल और उनकी शादी की यादों को समर्पित...  
प्यारी बहना दुल्हन बनी है, और उसके साज श्रृंगार का क्या कहना...

नया नया सा

Everything is new

कभी कभी यूँ भी होता है, कि सब कुछ नया नया सा लगता है, ऐसी ही अनुभूति को शब्दों में पिरोती कविता... 

नया नगर नया काम,
नयी सुबह नयी शाम...

संबल

White Pigeons Supporting each otherआकुल ह्रदय को संबल देती आशा
प्रतिकूल परिस्थिति में भी मन को संबल देती आशा की विजय को कविता में पिरोते शब्द...

संध्या का रंग सुनहरादमके जैसे संदल

अपरिचित पथ पर यूँ हीविचरित है मन चंचल...

एक लड़की अनोखी सी

बहुमुखी प्रतिभा के विविध रंग.
मेरी एक प्रतिभाशाली मित्र को समर्पित कविता. 
अनोखी सी एक लड़की से, हुई कुछ वक़्त पहले मुलाक़ात, जिसकी खूबियों के बखान में ढल सकती है रात...

दिल को समझाती हूँ मैं...

उम्मीद पर ही दुनिया कायम है...

अगर शिद्दत से चाहें तो ख्वाहिशें पूरी हो ही जाती हैं...

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