विविध-संकलन

उ.वि. की हिंदी लेखनी

कहानियां (लघु कथाएं)

रफ़्तार

बाल मन में बबूल के बीज बोयें, तो आम की अपेक्षा ना रखें
बचपन में गलत आदतों को अनुचित बड़ावा देने का दुष्परिणाम दर्शाती लघु कथा

ज्ञान-वर्धन

गूगल प्लस से करें अपनी रचनाएं सुरक्षित


चोरों / नक्कालों से इस तरह करें अपनी कृति की रक्षा

गूगल प्लस से चित्र पर “टेक्सट” या लिखित पंक्तियां जोड़कर, वाटरमार्क लगाएं, और अपनी रचना के स्वामी होने को प्रामाणिक करें. चित्रों में गूगल+ से टेक्सट/वॉटरमार्क के आरोपण/समावेश के सचित्र निर्देश.

फेसबुक हैश टैग - क्या होंगे अलग हट के?

चेहरों की किताब पर लगा # का ठप्पा
पिछले दिनों फेसबुक ने हैश टैग को अपनी सेवाओं में सम्मिलित करने की घोषणा की. ट्विटर (और गूगल+) का उपयोग करने वाले हैश टैग्‌स की महिमा से भली भांति परिचित है. तो फेसबुक पर कुछ अलग हट के होगा? या ये कदम नकल में अकल के अभाव का पर्याय सिद्ध होगा?

बसंत की सफाई में मुरझाया - गूगल रीडर को निगला गूगल


अलविदा, रीडर

कम उपयोग होने वाले वेब उत्पादों की छंटनी की चपेट में गूगल रीडर - १ जुलाई २०१३ के बाद गूगल रीडर की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी.

अभिव्यक्त

हमारे देशवासी, “हम" देशवासी

हमारे देशवासी, “हम" देशवासी
कल मेरा मन बहुत दु:खा... जहां केवल नापसंदगी, केवल असहमति काफी है, वहां घृणा के, ऐसी बेमतलब, बेवजह नफरत के बीज क्यों बोते हैं?
शर्म आ रही है, कि "हम" ऐसे हैं...

करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

हा हा हा ये छोटा सा विदूषक हंसाने में बड़ा माहिर होता जा रहा है. बस, कभी कभी खुद समझ नहीं पाता, कि हम इतनी ज़ोर से क्यों हंस रहे हैं.

मेरा प्यारा नन्हा सुधारक | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

ज़रा गलती कर के तो देखो... कहां हम सोचते थे, कि जयोम की गलतियां सुधारकर उसे अच्छा बोलना सिखाएंगे, यहां तो जनाब दो साल के हुए हैं नहीं और अभी से हमारी गलतियां सुधार रहे हैं

मुझे नींद न आए | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

जब आए तो चलो नींद को भगाएं न सोने के और नींद भगाने के ढेर उपाय हैं जयोम के पास. नींद चाहे अपने सारे हथियार अपना ले, जयोम की आखों में नींद भरी होती है, उबासियां भी आतीं हैं,
पर उसके पास तरीके भी शानदार हैं से दुश्मन से निपटने के.

कविताएं

आया राखी का त्यौहार - रक्षाबंधन के त्यौहार को समर्पित कविता

रक्षाबंधन के त्यौहार को समर्पित कविता. .

रंग बिरंग नग-मनके जड़ी,
राखियां सजी छोटी-बड़ी,
समेटे धागे में स्नेह अपार,
आया राखी का त्यौहार,


रक्षाबंधन की रौनक त्यौहार के कुछ दिन पहले ही से छाने लगती है. मेरी टेबल पर, राखियों का छोटा सा ढेर लगा है. सारे भाइयों के लिए उनकी पसंद के हिसाब से राखियां ले आई..