विविध-संकलन

अतरंगी अभिव्यक्तियों की सतरंगी कुटीर

कभी कोई कहानी अनकही सी,
कभी कोई किस्सा सुना-सुना सा,

कभी तुकबंदी मिलाते हुए शब्दों के मनके मिलकर कविता की माला में पिरोए हुए से,
तो किसी विशेष अवसर हेतु कुछ शुभकामना संदेश अपनी भाषा का अपनापन लिए,   

कभी कोई अभिभूत कर देने वाली अनुभूति अभिव्यक्त करता हुआ एक लेख,
तो कहीं विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी का ज्ञान-वर्धक उल्लेख, 

ऐसा है विविधता से परिपूर्ण... विविध-संकलन

शुभकामनाएं - संदेश हिंदी में...

झिलमिल सितारों से रोशन नया साल

Hindi New Year eCard - Jhilmil Sitaaron sa Naya Saal

नूतन वर्ष के लिए झिलमिलाती शुभकामना 

नई धुन हो, नई बंदिशें, नए हो सुर ताल,
झिलमिल सितारों से रोशन रहे नया साल…

 

नए साल की नई हो बात

Hindi New Year eCard - Nav Varsh Ki Shubhkamna

नए साल की शुभकामनाअों से परिपूर्ण सुंदर संदेश ~

एक छोटी सी कविता:

विगत वर्ष की ढली है रात,

नए साल की नई हो बात,

अभिव्यक्त

सास, बहु और... ज़हर!

सास, बहु... और ज़हर!
एक सास की हत्या करने की योजना बनाने वाली बहु की कहानी पढ़ी, और कहानीकार की मंशा देखकर सिर पीटने का मन किया. तो एक मूर्खतापूर्ण कहानी प्रेरणा है इस लेख की. व्यंग्य है, या कटाक्ष, या यथार्थ की व्यथा कहता दर्पण है, आप स्वयं निर्धारित करें

saas, bahu aur zahar

हमारे देशवासी, “हम" देशवासी

हमारे देशवासी, “हम" देशवासी
कल मेरा मन बहुत दु:खा... जहां केवल नापसंदगी, केवल असहमति काफी है, वहां घृणा के, ऐसी बेमतलब, बेवजह नफरत के बीज क्यों बोते हैं?
शर्म आ रही है, कि "हम" ऐसे हैं...

Barren Branches

करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

हा हा हा ये छोटा सा विदूषक हंसाने में बड़ा माहिर होता जा रहा है. बस, कभी कभी खुद समझ नहीं पाता, कि हम इतनी ज़ोर से क्यों हंस रहे हैं.

Jayom ne karvai hansi ki bauchar

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काव्य-कोष -- कुछ कविताएं

कभी कभी लगता है...

एक कविता जो मैंने अपने लिए लिखी है... बस यूं ही मन किया, कि कुछ ऐसा भी हो जो आप मुझी को समर्पित हो. मेरे बारे में कुछ बातें कहती कविता... कुछ अटपटी सी बातें, अटपटी पर असली. असली, मनचली हवा जो कभी मन मोह लेती है, और कभी चुगली बनकर गले में अटक जाती है.   

कभी चिड़ियों को आवाज़ बदलकर मैं आवाज़ लगाती हूँ,
कभी बंद कमरे में बिन बादल ही मोरनी-सा नाच रचाती हूँ, 
कभी घोड़ी का मानस धरकर यहां-वहां फुदकती फिरती हूँ,
और कभी, हाथ बांधे गांभीर्य ओड़ मैं इधर-उधर विचरती हूँ,
आंकलन करूं तो, दीवानेपन की गुगली तो मैं हूँ, 
कभी-कभी लगता है, थोड़ी सी पगली तो मैं हूँ

सितारों से पूछा

त्यौहारों में प्राचीन व धर्मसंगत विधि-क्रियाओं के अतिरिक्त समय के साथ जुड़ती हुई परंपराएं विकट परिस्थितियां उत्पन्न करती हैं. यह कविता सितारों से हुए काल्पनिक वार्तालाप के माध्यम से ऐसी ही एक समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है. इस वार्तालाप में छिपे व्यंग्य से किंचित्‌ एक दंभ से भरा मानस के कुतर्क व अनर्गल कर्म को सही ठहराने के प्रयत्न की भी अनुभूति हो सके. 

दीपावली पर लिखी हिंदी कविता

मेरी प्यारी अध्यापिका - बाल कविता

जयोम की कक्षा में वाक्‌ प्रतियोगिता के लिए लिखी एक छोटी सरल बाल कविता. 

घर छोड़ कर शुरु-शरू में स्कूल चला जब आता था,
मां को याद कर कर के, मैं बहुत आंसू बहाता था...

Meri Pyari Adhyapika - Hindi Poem for kids

ज्ञान-वर्धन

गूगल प्लस से करें अपनी रचनाएं सुरक्षित


चोरों / नक्कालों से इस तरह करें अपनी कृति की रक्षा

गूगल प्लस से चित्र पर “टेक्सट” या लिखित पंक्तियां जोड़कर, वाटरमार्क लगाएं, और अपनी रचना के स्वामी होने को प्रामाणिक करें. चित्रों में गूगल+ से टेक्सट/वॉटरमार्क के आरोपण/समावेश के सचित्र निर्देश.

गूगल+ से चित्र पर टेक्सट जोड़े, फॉण्ट बदलें

फेसबुक हैश टैग - क्या होंगे अलग हट के?

चेहरों की किताब पर लगा # का ठप्पा
पिछले दिनों फेसबुक ने हैश टैग को अपनी सेवाओं में सम्मिलित करने की घोषणा की. ट्विटर (और गूगल+) का उपयोग करने वाले हैश टैग्‌स की महिमा से भली भांति परिचित है. तो फेसबुक पर कुछ अलग हट के होगा? या ये कदम नकल में अकल के अभाव का पर्याय सिद्ध होगा?

फेसबुक हैश टैग - क्या होंगे अलग हट के?

कथा सृजन

रफ़्तार

बाल मन में बबूल के बीज बोयें, तो आम की अपेक्षा ना रखें
बचपन में गलत आदतों को अनुचित बड़ावा देने का दुष्परिणाम दर्शाती लघु कथा
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