थारी म्हारी पंचायत - कुछ मजेदार जुमले चुगलखोरों के

थारी म्हारी पंचायत

कुछ मजेदार जुमले चुगलखोरों के

पंचायती पड़ोसी हों या चुगलखोर रिश्तेदार, निम्न पंचायती जुमलों से आपका भी पाला पड़ा होगा. यदि पढ़ा होगा तो ये पढ़कर हंसी आनी तय है, दरअसल क्या है ना, हमारा "इमेजिनेशन" वो "गॉसिप" के "ग्लैमर" से दमकते चेहरे दिमाग में चित्रित कर देता है :)

सुनकर मन में बड़े अच्छे से जवाब आते हैं, जो हम दे नहीं पाते, बस खामोशी से मन ही मन मुस्कुरा देते हैं. अब हमारे मन में जो आता है, हमने तो लिख दिया, आपका मन भी कुछ मजेदार से खामोश जबाव देता हो, तो टिप्पणियाँ होती किसलिए हैं.

इब्तिदा

अच्छे निबंध की तरह मसालेदार गपशप के भी खंड होते है. शुरुआत में ही श्रोता को अपनी बात में बांधने के लिए "थारी म्हारी" करने वाले को धांसू शुरुआत करनी पड़ती है. आँखें बड़ी कर, भौंचक्का चेहरा बनाकर, कुछ इस तरह होती है, इब्तिदा -

अरे तुम्हें कुछ खबर है? / अरे तुम्हें पता चला?
वाचाल मन - नहीं BBC के हेड आॅफिस की कमान तो आपके पास है

सुना है कि फलां के यहां…
वाचाल मन - आपकी श्रवण शक्ति के क्या कहने

अरे, उड़ती-उड़ती खबर आई है कि…
वाचाल मन - आपके यहां सपेशल एअरपोर्ट है, जो उड़ती खबर लैंड कर गई

नमक मिर्ची

चलिए शुरुआत तो हो गयी, दो चार बेचारे श्रोता भी फंस ही गए, अब मानो कि बात ज्यादा दमदार न हो, यानि कि सब्ज़ी का तड़का ही कमज़ोर हो, तो तो भी निपुण चुगलखोर आपको बोर नहीं होने देंगे, भले ही नमक मिर्ची अपनी जेब से लग जाए.

बोलना तो नहीं चाहिए…
वाचाल मन - तो फिर बोल क्यों रहे हो

अब किस मुंह से कहूं…
वाचाल मन - दशानन हो, कि मुंह की चॉइस है आपके पास

कहते हुए भी शर्म आ रही है
वाचाल मन - यानि अगले दो मिनट में बेशर्म की उपाधि पाने योग्य हो जाओगे

इंतिहा

वैसे तो चुगलखोरों का मन अपने काम में ऐसा रमता है, कि उनको "ब्रेक" भी लेने का मन नहीं करता. (जिन्हें काम करते हुए थकान होती हो, वो इनसे प्रेरणा लें.)
और लें भी क्यों, आखिर ये काम तो नाश्ता करते, (कार्यालय के) "वॉशरूम" में हाथ धोते हुए, खाने की मेज़ पर, यानि किसी भी तरह के ब्रेक के साथ भी संभव है ना. वैसे आमतौर पर, पक्के वाले चुगलखोरों को और कोई काम होता ही नहीं, मेरा मतलब, गुस्ताखी माफ, ये लोग अपना काम "एक्सक्लूसिवली" करते है, या फिर अपने काम से ज्यादा तवज्जो "थारी म्हारी" को देते हैं.

पर क्या है ना, जो शुरु किया है, उसको खतम तो करना ही पड़ता है, श्रोता सारे इतने समर्पित जो नहीं होते. तो ज्यों लौ बुझने से पहले ज़ोर से दिपदिपाती है, वैसे ही, ये दिलचस्प चर्चा विराम पाने के पहले ज़ोर-शोर से भकभकाती है.

राज़ की बात तो ये है…
वाचाल मन - जब आपको पता चल गया, तो राज़ कहां रहा

हम तो पहले ही समझ गए थे…
वाचाल मन - हाँ जी, अंतर्यामी जो ठहरे

अब आपसे क्या छुपाना…
वाचाल मन - ओहो, बाकी सबके सामने पेट में पचा लिया? हमने क्या बिगाड़ा था जी?

मैंने तो यहां तक सुना है कि…
वाचाल मन - कहां कहां तक फैले हुए हैं आपके सूत्र?

और जाते जाते, एक आखरी जुमला और

किसी को बताना मत…
वाचाल मन - मतलब ट्विटर ट्रेंड से ज़्यादा इसी बात की चर्चा करना

सच मेरा मन तो कहता है, कि अगर हमारे इन चुगलखोरों के सबके ट्विटर अकाउंट बन जाते, तो देश-विदेश के ट्रेंड्‌स में सबसे ऊपर होती "थारी म्हारी पंचायत"

© 2013, UV Associates
All rights reserved