करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

जयोम ने करवाई हंसी की बौछार

हा हा हा

जयोम ने करवाई हंसी की बौछार

बढ़े दिन हुए कुछ लिखे जयोम जी के बारे में, क्या करें, जनाब हमें समय ही नहीं देते हैं.
आजकल अक्सर ही अपनी प्यारी बातों से, अपने हाज़िर जवाबों से हंसी की बौछार लगवा देते हैं.

अभी परसों के दिन, न सोने के लिए, पहले मेरी बंद आंखों पर उंगलियां लगा रहा था. डांट दिया. तो सोचने लगा अब क्या करूं.
कहता है, "चिड़िया उड़, तोता उड़, मैना उड़, पापा तो गाड़ी ही उड़ा देते हैं." :D
दरअसल थोेड़े दिन पहले, मैं और उसके पापा उसका दिल बहलाने खेल रहे थे, और उसके पापा के गलती से गाड़ी उड़ाने पर मैंने उन्हें चिढ़ाया था, कि देखो जयोम पापा तो गाड़ी भी उड़ा देते हैं. मैं हंस हंस कर लोटपोट हो गई.
-------------

कुछ देर खेल, फिर सुलाने की कोशिश करी, इस बार जयोम को मेरी "डांस क्लास” याद आ गई. जयोम ने आधी अधूरी सी आलथी पालथी लगाई, और हथेलियां घुटने पर रखकर (अंगूठे संग पहली उंगली जोड़कर) बोला, मम्मा डांस क्लास में ऐसे बोलते हैं, ओम. फिर बोला, “सा"
२ दिन पहले साथ ले गई थी उसे. उस दिन गायन की कक्षा थी.
इतना प्यारा लग रहा था, कि मैंने कहा, वापस से करो न, तो बोला, "मम्मा पालथी बना दो".
--------------

एक दिन मैंने आजिज़ आकर हाथ जोड़कर उससे थोड़े राग में कहा, "हनुमान के अवतार”, तो बोला, “हनुमाअवता”... मैंने कहा, "सो जाओ", तो उसी राग में बोला, “न.ही..."
--------------

थोड़े दिन पहले, सुबह उसके पापा को उठाने भेजा मैंने. एक बार तो पापा बोले, आ रहा हूं, फिर जयोम ने देखा नहीं आए, तो गया दोबारा उठाने. बोला, “पापा उठो ना, मेरे साथ खेलो”
बोल कर बाहर निकला, पीछे देखता हुआ, कि पापा आ रहे हैं कि नहीं. पर न पापा आए, न उनकी कोई आवाज़. तो गुस्से से बोला, "कोई जवाब नहीं दे रहे हो”!! नकल तो मेरे ही शब्दों की उतारी थी, पर गुस्सा उसका अपना था, जो कि बढ़ा प्यारा था.
--------------

जब उसकी दीदी स्कूल छोड़ने जाती है, तो उसे पहले गाड़ी में बैठा कर, फिर कहती है, थोड़ी साइड दे दो बेटा. तो जयोम बाबू ज़रा खिसक कर बैठने की जगह दे देते हैं. लेकिन दो तीन दिन से साइड देने में ज़रा नखरे कर रहे थे. परसों जरा देरी हो रही थी, तो दीदी ने खुद ही उसे थोड़ा बीच में बैठाया, और झट से अंदर बैठ गई. जयोम को ज़रा अखर गया, बोला, “दीदी, मैं आपको साइड दे तो रहा था ना"
---------------

टीवी पर चुनाव संबंधित विज्ञापन देख देख कर, जयोम को चेहरे और चुनावी जुमले दोनों ही याद हो गए हैं. चार-पांच दिन पहले, सुबह के समय पापा के साथ कहीं से वापस आ रहा था. नीचे वाले घर का अखबार दरवाज़े के नीचे खिसकाया हुआ पढ़ा था. देख कर बोला, पापा ये अबकी बार मोदी सरकार, नीचे चली गई. :D
और जैसे ही टी.वी. पर सुनाई देता है, “कमल का बटन दबाएंगे...” जनुष कहता है, "झाड़ू का बटन दबाएंगे."
---------------

अभी मुझे आकर बोला, “मम्मा, कितनी खतरनोखाक बिल्ली है.” थोड़ी देर तो मैं समझी ही नहीं. फिर समझी, जनाब कहना चाहते हैं, कि “कितनी खतरनाक बिल्ली है”
दरअसल नीचे उसकी प्रीति बुआ ने ऐसा ही खतरनाक विवरण देकर उसे एक बिल्ली के पास जाने से रोका था.

© 2014, UV Associates
All rights reserved